Swami Vivekananda Essay: स्वामी विवेकानंद जयंती पर पढ़े ये निबंध (Swami Vivekananda Paragraph for Class 5) PDF Download

By | January 11, 2024
Swami Vivekananda Essay in Hindi

Swami Vivekananda Essay in Hindi :-स्वामी विवेकानंद भारत में जन्में सभी महापुरुषों में से एक है। विवेकानंद एक महान ज्ञानी, महान संत एवं नेता थे। जिन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना किए थे। भारत में प्रत्येक वर्ष 12 जनवरी को उनके जन्मदिन पर राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है। बचपन के समय से ही भगवान को जानने की लालसा होने के कारण 25 वर्ष के आयु में सांसारिक मोह माया एवं अपने घर को त्याग कर सन्यासी का रूप धारण कर लिए थे। रामकृष्ण परमहंस से इनका संपर्क होने के बाद इनका धार्मिक एवं संतो की जीवन यात्रा आरंभ हुई थी। और रामकृष्ण परमहंस को अपना गुरु बना लिए थे। इसके बाद इन्होंने वेदांत प्रचार का नेतृत्व किए किया और भारतीय हिंदू धर्म के दर्शन को पश्चिमी देशों से जोड़ने का कार्य किए थे। ऐसे में यदि आप लोग विद्यार्थी है तो स्वामी विवेकानंद का निबंध आपका विषय बन सकता है। आपके परीक्षा में यह प्रश्न आ सकता है कि स्वामी विवेकानंद पर निबंध कैसे लिखें।

तो आईए हम आपको आर्टिकल के माध्यम से स्वामी विवेकानन्द पर निबंध | Essay on Swami Vivekananda,स्वामी विवेकानंद पर निबंध | Swami vivekanand Per Nibandh,स्वामी विवेकानन्द निबंध हिंदी में | Swami Vivekananda Essay in Hindi, स्वामी विवेकानंद पर निबंध 200 शब्द,स्वामी विवेकानन्द पर लघु निबंध | Short Essay on Swami vivekananda, स्वामी विवेकानन्द निबंध पीडीएफ | Swami Vivekananda Essay pdf, स्वामी विवेकानन्द पैराग्राफ | Swami Vivekananda Paragraph, स्वामी विवेकानन्द पैराग्राफ 150 शब्द | Swami Vivekananda Paragraph 150 words, कक्षा 5 के लिए स्वामी विवेकानन्द पैराग्राफ | Swami Vivekananda Paragraph for Class 5, स्वामी विवेकानन्द पर संक्षिप्त टिप्पणी | Short Note on Swami Vivekananda संबंधित जानकारी विस्तार पूर्वक प्रदान कर रहे हैं इसलिए आप लोग इस आर्टिकल को अंत तक पढ़े।

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Swami Vivekananda Essay in Hindi: Overview

आर्टिकल का नामस्वामी विवेकानंद पर निबंध इन हिंदी में 
आर्टिकल का प्रकारनिबंध
साल2024
स्वामी विवेकानंद का जन्म12 जनवरी 1863
स्वामी विवेकानंद का जन्म स्थानकोलकाता
स्वामी विवेकानंद का बचपन का नामनरेंद्र नाथ दत्त 
स्वामी विवेकानंद का मृत्यु4 जुलाई 1902
स्वामी विवेकानंद कौन सा मिशन के संस्थापक थेरामकृष्ण मिशन
स्वामी विवेकानंद के जयंती को किस रूप में मनाया जाता हैराष्ट्रीय युवा दिवस
स्वामी विवेकानंद के गुरु कौन थेरामकृष्ण परमहंस

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स्वामी विवेकानन्द पर निबंध | Essay on Swami Vivekananda

प्रस्तावना

भारत एक बहुत ही विशाल देश है। यहाँ प्रत्येक धर्म व समुदाय के लोग रहते है। आदिकाल से ही भारत को विश्व गुरु कहा जाता था। भारत को विश्व गुरु बनाने में बहुत से महान लोगों को योगदान रहा था।

भारत में समय-समय पर बहुत से लोगों ने जन्म हुआ, जिन्होंने विश्व मंच पर भारत का नाम रोशन किया। उन्हीं में एक महान व्यक्ति का स्वामी विवेकानंद जी है।

भारत में स्वामी विवेकानंद जी को एक देशभक्त सन्यासी के नाम से जाना जाता है, जिन्होंने भारत की संस्कृति को विश्व के समक्ष रखा। उन्होंने विश्व मे हिन्दू दर्शन के सिद्धांतों का प्रसार किया। उनका काफी महान व्यक्तित्व था।

स्वामी विवेकानंद का प्रारंभिक जीवन

स्वामी विवेकानंद जी का जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता शहर में हुआ था। उनका जन्म एक कुलीन कायस्थ परिवार में हुआ था। उनके बचपन का नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था।

उनके पिता का नाम विश्वनाथ दत्त था, जो कलकत्ता के उच्च न्यायलय में एक प्रसिद्ध वकील थे। उनके जीवन पर उनके दादा का काफी अधिक प्रभाव था। उनके दादाजी का नाम दुर्गाचरण दत्त था।

वह संस्कृत व फ़ारसी भाषा के बहुत बड़े विद्वान थे। उनकी माता का नाम भुवनेश्वरी देवी था। वह एक धार्मिक प्रवृत्ति की महिला थी। उनके माता-पिता के धार्मिक, प्रगतिशील व तर्कसंगत व्यवहार ने उनके विचारों को आकार प्रदान करने में सहायता प्रदान की।

वह बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के धनी थे। वह बचपन में बहुत ही शरारती बालक थे। उनके घर में प्रतिदिन पुराणों का अध्ययन होता था। जिससे बचपन से ही धर्म एवं आध्यात्म के गुण उनके अंदर आने लगे थे। उनमें भगवान को जानने की काफी उत्सुकता थी।

स्वामी विवेकानंद की शिक्षा

सन 1871 में इन्होने ईश्वर चंद्र विद्यासागर के मेट्रोपोलिटन संस्थान में दाखिला लिया। उस समय उनकी आयु मात्र 8 वर्ष थी, जब वह विद्यालय जाते थे। सन 1877 में उनका परिवार रायपुर में रहने लगा।

सन 1879 में वह एकमात्र ऐसे छात्र थे, जिन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज प्रवेश परीक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की। उन्हें सामाजिक विज्ञान, दर्शन, धर्म, इतिहास, कला और साहित्य पढ़ना बहुत पसंद था। पढ़ने के साथ-साथ वह शारीरिक खेलों व व्यायामों में भी हिस्सा लिया करते थे।

स्वामी विवेकानंद का योगदान व महत्व

उन्होंने अपने छोटे से जीवनकाल में ऐसे-ऐसे कार्य किये थे कि जिससे हमारे देश की अनेकों पीढ़ियों का मार्गदर्शन हो सकता है। उनके जीवन में सबसे प्रसिद्ध घटना शिकागो की थी। वह घटना अमेरिका के विश्व धर्म सम्मेलन की थी, जहाँ वह हिन्दू धर्म का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।

जहाँ उनके भाषण की शुरुआत ने ही वहाँ की पूरी जनता को मंत्रमुग्ध कर दिया। जहाँ पहले उन्हें कोई सुनना नहीं चाहता था, उस भाषण के शुरू होने के बाद पूरे हाॅल में सिर्फ उनकी ही आवाज आ रही थी।सभी उन्हें बहुत ध्यान से सुन रहे थे। उन्होंने भाषण की शुरुआत में कहा था ‘मेरे अमेरिकी भाइयों व बहनों’। यह भाषण 2 घंटे से भी अधिक चला, जहाँ उन्होंने हिन्दू धर्म को विस्तार से समझाया।

उपसंहार

स्वामी विवेकानंद जी सिर्फ एक संत ही नही थे, वह एक देशभक्त, मानव प्रेमी, लेखक व एक अच्छे विचारक थे। उन्होंने अपनी छोटी से आयु में ही बहुत बड़े-बड़े कार्य किए। उन्हें अपने भारतीय होने पर बहुत गर्व था। उन्हें पुस्तकें पढ़ने का बहुत शौक था।

उन्होंने हिन्दू धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए कईं विदेशी यात्राएं की। उनके गुरु का नाम रामकृष्ण परमहंस था। उनकी 4 जुलाई 1902 को मृत्यु बेलूर में रामकृष्ण मठ में हो हुई थी। वह बहुत ही महान व्यक्तित्व के धनी थे।

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स्वामी विवेकानंद पर निबंध | Swami Vivekanand Per Nibandh

परिचय

स्वामी विवेकानन्द एक महान भारतीय हिंदू भिक्षु और एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक नेता थे। एक आध्यात्मिक नेता होने के अलावा वह एक उत्कृष्ट विचारक और महान वक्ता भी थे। वह रामकृष्ण परमहंस के प्रमुख शिष्य थे और उनके दर्शन को एक नए स्तर पर ले गए।

एक भिक्षु की तरह रहना

1886 में रामकृष्ण परमहंस की मृत्यु के बाद उनके अनुयायियों ने विवेकानन्द और अन्य शिष्यों को समर्थन देना बंद कर दिया। उन्हें उत्तरी कलकत्ता के बारानगर में एक जीर्ण-शीर्ण इमारत में रहने के लिए मजबूर किया गया।

इस भवन को रामकृष्ण संप्रदाय का पहला मठ घोषित किया गया था। विवेकानन्द और रामकृष्ण के पन्द्रह अन्य शिष्यों ने उसी मठ में भिक्षु बनने की शपथ ली। वे योग और ध्यान करते थे और भिक्षा या “मधुकारी” द्वारा दान की गई भिक्षा पर जीवित रहते थे।

भारत भ्रमण

बारानगर मठ में कुछ समय बिताने के बाद, विवेकानन्द ने इसके धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पहलुओं को समझने के लिए पूरे देश की यात्रा करने का निर्णय लिया। इस दौरान वे लोगों के जीवन में आने वाली समस्याओं से रूबरू हुए और इन लोगों को उनके कष्टों से मुक्ति दिलाने का प्रण लिया।

रामकृष्ण मिशन की स्थापना

स्वामी विवेकानन्द ने 1 मई 1897 को कलकत्ता के निकट बेलूर मठ में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। रामकृष्ण मिशन की स्थापना कर्म योग के दर्शन के आधार पर की गई थी और इसका प्राथमिक उद्देश्य गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा करना है।

रामकृष्ण मिशन ने अस्पतालों, कॉलेजों और स्कूलों की स्थापना और संचालन जैसी विभिन्न सामाजिक सेवाएँ भी कीं। मिशन ने सम्मेलनों, कार्यशालाओं एवं सेमिनारों के माध्यम से वेदांत के प्रचार-प्रसार का कार्य भी किया। यह देश में कई राहत और पुनर्वास कार्यों में भी शामिल था।

निष्कर्ष

स्वामी विवेकानन्द द्वारा स्थापित रामकृष्ण मिशन आज सामाजिक कार्यों की एक शृंखला में शामिल है, जो पूरे देश के साथ-साथ विदेशों में भी सैकड़ों शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल और अन्य संगठन चला रहा है।

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स्वामी विवेकानन्द निबंध हिंदी में | Swami Vivekananda Essay in Hindi

प्रस्तावना

स्वामी विवेकानंद भारत में जन्म हुए महापुरुषों में से एक है। अपने महान कार्यों द्वारा उन्होंने पाश्चात्य जगत में सनातन धर्म, वेदों तथा ज्ञान शास्त्र को काफी ख्याति दिलायी और विश्व भर में लोगो को अमन तथा भाईचारे का संदेश दिया

स्वामी विवेकानंद का प्रारंभिक जीवन

विश्वभर में ख्याति प्राप्त संत, स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता में हुआ था। वह बचपन में नरेन्द्र नाथ दत्त के नाम से जाने जाते थे। इनकी जयंती को भारत में प्रत्येक वर्ष राष्ट्रीय युवा दिवस के रुप में मनाया जाता है। वह विश्वनाथ दत्त, कलकत्ता उच्च न्यायालय के वकील, और भुवनेश्वरी देवी के आठ बच्चों में से एक थे। वह बहुत धार्मिक और आध्यात्मिक व्यक्ति थे और अपने संस्कृत के ज्ञान के लिए लोकप्रिय थे।स्वामी विवेकानंद सच बोलने वाले, अच्छे विद्वान होने के साथ ही एक अच्छे खिलाड़ी भी थे। वह बचपन से ही धार्मिक प्रकृति वाले थे और ईश्वर की प्राप्ति के लिए काफी परेशान थे।

स्वामी विवेकानद का ह्रदय परिवर्तन

एक दिन वह श्री रामकृष्णसे मिले, तब उनके अंदर श्री रामकृष्ण के आध्यात्मिक प्रभाव के कारण बदलाव आया। श्री रामकृष्ण को अपना आध्यात्मिक गुरु मानने के बाद वह स्वामी विवेकानंद कहे जाने लगे।

वास्तव में स्वामी विवेकानंद एक सच्चे गुरुभक्त भी थे क्योंकि तमाम प्रसिद्धि पाने के बाद भी उन्होंने सदैव अपने गुरु को याद रखा और रामकृष्ण मिशन की स्थापना करते हुए, अपने गुरु का नाम रोशन किया।

स्वामी विवेकानंद का शिकागो भाषण

स्वामी विवेकानंद ने अपने ज्ञान तथा शब्दों द्वारा पूरे विश्व भर में हिंदु धर्म के विषय में लोगो का नजरिया बदलते हुए, लोगो को अध्यात्म तथा वेदांत से परिचित कराया। अपने इस भाषण में उन्होंने विश्व भर को भारत के अतिथि देवो भवः, सहिष्णुता और सार्वभौमिक स्वीकार्यता के विषय से परिचित कराया।

निष्कर्ष

स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुष सदियों में एक बार ही जन्म लेते हैं, जो अपने जीवन के बाद भी लोगो को निरंतर प्रेरित करने का कार्य करते हैं। यदि हम उनके बताये गये बातों पर अमल करें, तो हम समाज से हर तरह की कट्टरता और बुराई को दूर करने में सफल हो सकते हैं।

स्वामी विवेकानंद पर निबंध 100 शब्द

स्वामी विवेकानन्द एक हिंदू भिक्षु थे और पश्चिमी दुनिया को भारतीय दर्शन और आध्यात्मिकता से परिचित कराने वाले एक प्रमुख व्यक्ति थे। 1863 में कलकत्ता में जन्मे, वह हिंदू धर्म, आध्यात्मिकता और व्यक्तिगत आत्म-बोध के महत्व पर अपने प्रेरक भाषणों और लेखों के लिए जाने जाते थे। वह महान भारतीय संत रामकृष्ण के शिष्य बन गए और उन्होंने अपना जीवन अपने गुरु की शिक्षाओं के प्रसार के लिए समर्पित कर दिया।

1893 में, उन्होंने शिकागो में विश्व धर्म संसद में भारत और हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व किया, जहां उन्होंने व्याख्यानों की एक श्रृंखला दी, जिन्हें व्यापक मान्यता और सराहना मिली। उनके भाषणों में सभी धर्मों की एकता और मानवता की सेवा के महत्व पर जोर दिया गया। स्वामी विवेकानन्द की शिक्षाएँ दुनिया भर के लाखों लोगों को प्रेरित करती रहती हैं और उनकी विरासत आज की तेज़ गति वाली दुनिया में भी प्रासंगिक बनी हुई है।

स्वामी विवेकानंद पर निबंध (200 शब्द)

स्वामी विवेकानन्द एक हिंदू भिक्षु और 19वीं सदी के भारतीय रहस्यवादी रामकृष्ण के शिष्य थे। उन्हें आधुनिक भारत के सबसे प्रभावशाली आध्यात्मिक नेताओं में से एक माना जाता है और उनकी शिक्षाओं का दुनिया भर के लाखों लोगों पर गहरा प्रभाव पड़ा है।

स्वामी विवेकानन्द के सार्वभौमिक भाईचारे, सहिष्णुता और स्वीकार्यता के संदेश ने उन्हें सभी उम्र और पृष्ठभूमि के लोगों के लिए प्रेरणा बना दिया है। उनका मानना था कि प्रत्येक व्यक्ति में अपने सर्वोच्च आत्मा को महसूस करने की क्षमता है और मानव जीवन का अंतिम लक्ष्य परमात्मा के साथ मिलन प्राप्त करना है।

विरोध का सामना करने पर भी अपने विश्वासों के प्रति उनका अटूट समर्पण, एक ऐसा पहलू है जो स्वामी विवेकानन्द को प्रेरणा का स्रोत बनाता है। उन्होंने ऐसे समय में पश्चिम की यात्रा की जब भारतीय संस्कृति और धर्म को अच्छी तरह से समझा नहीं गया था, और उन्होंने लोगों को जागरूक करने और सांस्कृतिक अंतर को मिटाने का जिम्मा अपने ऊपर ले लिया।

स्वामी विवेकानन्द के प्रेरणादायक होने का एक अन्य कारण उनका व्यावहारिक आध्यात्मिकता पर जोर देना है। उनका मानना था कि सच्ची आध्यात्मिकता में किसी के विश्वास को क्रियान्वित करना शामिल है, और उन्होंने लोगों को दूसरों की सेवा करने और दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने के लिए अपनी प्रतिभा और क्षमताओं का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया।

अंत में, अपने विचारों को सीधे लेकिन प्रभावशाली तरीके से व्यक्त करने में स्वामी विवेकानन्द की उल्लेखनीय कुशलता उन्हें आध्यात्मिकता और आत्म-वृद्धि के लिए एक सम्मोहक वकील के रूप में स्थापित करती है। उनके भाषण और लेख प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं, जो आध्यात्मिकता के परिवर्तनकारी प्रभाव के स्थायी प्रमाण के रूप में कार्य करते हैं।

स्वामी विवेकानन्द पर लघु निबंध | Short essay On Swami Vivekananda

परिचय

स्वामी विवेकानन्द एक भारतीय हिंदू भिक्षु और विद्वान थे। वह भारत में हिंदू धर्म के पुनरुद्धार के पीछे एक प्रमुख शक्ति थे, और उनकी शिक्षाओं को दुनिया भर में लाखों लोगों ने अपनाया है।

स्वामी विवेकानन्द: बचपन

स्वामी विवेकानन्द का जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता में नरेन्द्र नाथ दत्त के रूप में हुआ था। उनका जन्म विश्वनाथ दत्त और भुवनेश्वरी देवी के यहाँ हुआ था। कम उम्र में ही, उन्होंने संस्कृत ग्रंथों में महारत हासिल कर ली और हिंदू धर्म के दार्शनिक पहलुओं के बारे में बेहद जानकार थे। बहुत कम उम्र में उनके पिता की मृत्यु ने उन पर गहरा प्रभाव डाला और उनके जीवन के उद्देश्य के लिए दिशा निर्धारित की। पढ़ने के प्रति उनके जुनूनी प्रेम ने उनके शिक्षकों को यह टिप्पणी करने के लिए प्रेरित किया कि वह निश्चित रूप से दुनिया पर एक स्थायी प्रभाव डालेंगे।

दर्शन और शिक्षाएँ

स्वामी विवेकानन्द को 1893 में शिकागो की धर्म संसद में अपने भाषण के लिए जाना जाता है, जिसमें उन्होंने हिंदू धर्म की जोशीली रक्षा के साथ अंतर्राष्ट्रीय मंच पर धूम मचा दी थी। उनकी शिक्षाएँ वेदांत दर्शन पर आधारित थीं, जो उपनिषदों की शिक्षाओं पर आधारित है। उनका मानना था कि सत्य और आध्यात्मिक ज्ञान आसन्न था, और उन्होंने एकता, प्रेम और सभी जीवित चीजों की दिव्यता के संदेश के साथ हिंदू धर्म को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया। वह दूसरों की सेवा के भी महान समर्थक थे। उन्होंने रामकृष्ण मिशन की भी स्थापना की जो आज भी भारत और दुनिया भर में सक्रिय है।

निष्कर्ष

स्वामी विवेकानन्द ने 4 जुलाई 1902 को महासमाधि प्राप्त की। अपने छोटे से जीवन में, स्वामी विवेकानन्द ने हिंदू विचारधारा को आकार देने और लाखों लोगों को आध्यात्मिक एकता और दूसरों की सेवा की शक्ति के बारे में शिक्षित करने में मदद की। उनका प्रभाव और विरासत आज भी विशेषकर युवाओं के बीच जीवित है।

स्वामी विवेकानन्द निबंध पीडीएफ | Swami Vivekananda Essay PDF

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स्वामी विवेकानन्द पैराग्राफ | Swami Vivekananda Paragraph

स्वामी विवेकानन्द एक भारतीय दार्शनिक, एक हिंदू भिक्षु और एक आध्यात्मिक नेता थे।

उनका जन्म नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था, जो बाद में बदलकर स्वामी विवेकानन्द हो गया।

उनका जन्म 12 जनवरी 1863 को हुआ था।

वह कोलकाता के एक बंगाली परिवार से थे।

वे श्री रामकृष्ण परमहंस के शिष्य थे।

उनके जन्मदिन को भारत में राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है।

उन्होंने 1893 में शिकागो में एक यादगार भाषण दिया था।

वह रामकृष्ण मिशन के संस्थापक हैं।

उन्होंने अपना जीवन लोगों को वेदांत के बारे में सिखाने में बिताया।

जुलाई 1902 को बेलूर मठ में ध्यान करते समय उनकी मृत्यु हो गई।

स्वामी विवेकानन्द पैराग्राफ 150 शब्द | Swami Vivekananda Paragraph (150 Words)

स्वामी विवेकानन्द भारत माता के महान सपूत थे। उनका बचपन का नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। उनका जन्म 12 जनवरी, 1863 को कोलकाता में हुआ था। उनके पिता बिश्वनाथ दत्त और माता भुवनेश्‍वरी देवी थीं। उन्होंने मेट्रोपॉलिटन स्कूल और स्कॉटिश चर्च कॉलेज से पढ़ाई किए थे।

25 वर्ष के आयु में सन्यासी बनने के बाद अपनी युवावस्था में, वह अपने गुरु श्री रामकृष्ण के संपर्क में आये थे। श्री रामकृष्ण परमहंस के निधन के बाद वे भिक्षु बन गये। 1893 में उन्होंने शिकागो धर्म संसद में भाग लिया। वहां उन्होंने हिंदू धर्म और भारत की महिमा प्रस्तुत किए थे। इस भाषण में उन्होंने पूरी दुनिया का दिल जीत लिए थे। घर लौटकर उन्होंने बेलूर, हावड़ा में रामकृष्ण मठ और मिशन की स्थापना किए थे।

उन्होंने राजयोग, कर्मयोग और ज्ञानयोग जैसी कई किताबें लिखीं। स्वामीजी साहस और शक्ति के प्रतीक थे। उन्होंने मनुष्यों में अपना ईश्वर पाया। इस हिंदू भिक्षु का 4 जुलाई 1902 को 39 वर्ष के आयु में निधन हो गया।

स्वामी विवेकानंद पर निबंध (250 शब्द)

स्वामी विवेकानन्द हमारे देश के एक महान धार्मिक सुधारक थे। उनका जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता में हुआ था। उनके बचपन का नाम नरेंद्रनाथ दत्ता था। उनके पिता बिस्वनाथ दत्ता एक प्रसिद्ध वकील थे और उनकी माँ भुवनेश्वरी देवी एक धर्मपरायण महिला थीं। एक लड़के के रूप में वह बहुत बुद्धिमान और असाधारण थे। आध्यात्मिक विचारों में उनकी गहरी रुचि थी। उन्होंने मेट्रोपॉलिटन इंस्टीट्यूशन से प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की। 1884 में उन्होंने बी.ए. पूरा किया। स्कॉटिश चर्च कॉलेज से दर्शनशास्त्र में ऑनर्स की डिग्री।

वह सदैव ईश्वर का साक्षात्कार करना चाहता था। श्री रामकृष्ण से मिलना इस जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ था। वह रामकृष्ण के शिष्य बन गए और पैदल ही पूरे भारत की यात्रा की। उन्हें स्वामी विवेकानन्द के नाम से जाना जाने लगा। स्वामी जी ने पश्चिमी देशों में भारतीय हिंदू धर्म दर्शन का परिचय दिया। उन्होंने जाति व्यवस्था और छुआछूत का डटकर विरोध किया।

उन्होंने 1893 में शिकागो में धार्मिक सम्मेलन में भाग लिया और दुनिया भर में मानवता का संदेश दिया। गरीबों को सामाजिक सेवा प्रदान करने के लिए उन्होंने 1897 में बेलूर मठ और रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। उन्होंने भारत में विभिन्न स्थानों पर कई अस्पताल, पुस्तकालय, स्कूल भी स्थापित किए।

स्वामी विवेकानन्द की शिक्षाओं ने न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व के युवाओं को प्रेरित किया। स्वामी विवेकानन्द की जयंती भारत में राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाई जाती है। स्वामीजी ने 4 जुलाई 1902 को 39 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। उनकी आत्मा सदैव हमारी प्रेमपूर्ण स्मृति में रहेगी।

कक्षा 5 के लिए स्वामी विवेकानन्द पैराग्राफ | Swami Vivekananda Paragraph For Class-5

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था। स्वामी विवेकानंद एक महान भारतीय संत थे। वे उच्च विचार और सादा जीवन जीने वाले व्यक्ति थे।

श्री विश्वनाथ और भुवनेश्वरी देवी के पुत्र स्वामी विवेकानंद को शुरुआती दिनों में नरेंद्रनाथ दत्ता के नाम से पुकारा जाता था।

स्वामी विवेकानंद पहली बार रामकृष्ण परमहंस से मिले थे, जब रामकृष्ण परमहंस कोलकाता में अपने दोस्तों के घर गए थे। स्वामीजी ने शिकागो के अपने अविश्वसनीय भाषण से दर्शकों को अमेरिका की बहनों और भाइयों के रूप में संबोधित करके सभी का दिल जीत लिया।

स्वामी विवेकानन्द पर संक्षिप्त टिप्पणी | Short Note On Swami Vivekananda

परिचय

स्वामी विवेकानन्द भारत के सबसे प्रभावशाली आध्यात्मिक नेताओं और समाज सुधारकों में से एक थे। वह एक आध्यात्मिक शिक्षक थे जो भारत में हिंदू धर्म के पुनरुद्धार में एक प्रमुख व्यक्ति बने और भारत के लोगों के अधिकारों के लिए एक प्रमुख आवाज के रूप में कार्य किया। वह अपने प्रेरणादायक भाषणों और गरीबों, पीड़ितों और वंचितों की मदद करने के प्रति अपनी भावुक भक्ति के लिए जाने जाते हैं।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

12 जनवरी 1863 को स्वामी विवेकानन्द का जन्म कलकत्ता, भारत में हुआ था। उनका जन्म विश्वनाथ दत्त और भुवनेश्वरी देवी के घर नरेंद्र नाथ दत्त के रूप में हुआ था। वह एक पारंपरिक बंगाली परिवार से आते हैं और आध्यात्मिकता और सीखने के प्रति प्रारंभिक प्रतिबद्धता प्रदर्शित करते हैं। वह अपने परिवार की धार्मिक आस्था और दान पर जोर से प्रभावित थे, इसलिए वह एक समाज सुधारक बन गए। वे वेदांत सहित विभिन्न धार्मिक परंपराओं से भी अवगत हुए, जिसका अध्ययन उन्होंने बड़े होने के साथ भारत में विभिन्न शिक्षकों के साथ किया।

रामकृष्ण परमहंस से मुलाकात

1881 में, 18 वर्ष की आयु में, स्वामी विवेकानन्द की मुलाकात अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस से कोलकाता के निकट दक्षिणेश्वर में हुई। विवेकानन्द अपने गुरु के आध्यात्मिक करिश्मा और गहन ज्ञान से बहुत प्रभावित हुए और रामकृष्ण के शिष्य बन गये। बड़े उत्साह के साथ, उन्होंने खुद को रामकृष्ण परमहंस की शिक्षाओं में महारत हासिल करने और उनका विस्तार करने के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने हिंदू दर्शन और अन्य आध्यात्मिक सिद्धांतों के बारे में सीखा और फिर अपने साथियों और अन्य धर्मों के लोगों को उनका अर्थ समझाने की कोशिश की। रामकृष्ण परमहंस ने उन्हें बिना किसी स्वार्थ के आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करना सिखाया और इससे स्वामी विवेकानन्द के जीवन में बहुत गहरा परिवर्तन आया।

शिक्षा और प्रेरणा

स्वामी विवेकानन्द एक प्रभावशाली विचारक और शिक्षक थे जिन्होंने भारत की सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था में सुधार करने के साथ-साथ हिंदू धर्म को सबसे आगे लाने का प्रयास किया। वह एक प्रसिद्ध शिक्षक और वक्ता थे, जो पूरे भारत और विदेशों में प्रमुख आध्यात्मिक उत्सवों में बोलते थे। उनके असाधारण भाषणों ने, जिसमें 1893 में विश्व धर्म संसद में उनका शक्तिशाली भाषण भी शामिल था, काफी ध्यान आकर्षित किया और उन्हें सुनने वाले कई लोगों पर अमिट छाप छोड़ी।

स्वामी विवेकानन्द: एक समाज सुधारक

स्वामी विवेकानन्द एक उत्साही समाज सुधारक थे। उनका मानना ​​था कि भारत की उन्नति के लिए शिक्षा अनिवार्य है और वे सभी लोगों और संस्कृतियों के बीच समानता में विश्वास करते थे। वह पुरातन और दमनकारी जाति व्यवस्था के साथ-साथ महिलाओं की अधीनता के प्रबल विरोधी थे। उन्होंने गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ी, गरीबों के लिए स्वच्छ और स्वच्छ रहने की स्थिति और स्वास्थ्य देखभाल की वकालत की, साथ ही शिक्षा तक बेहतर पहुंच और जातियों के समान व्यवहार की वकालत की। वह भारत के अछूतों के संघर्ष और उनकी पीड़ा को समाप्त करने की आवश्यकता के बारे में अविश्वसनीय रूप से भावुक थे।

निष्कर्ष

वह 4 जुलाई 1902 का दिन था, जब स्वामी विवेकानन्द की ध्यान के दौरान मृत्यु हो गयी। वह एक प्रभावशाली नेता थे जिनके विश्वास, सम्मान और समानता के संदेश ने पूरी पीढ़ी को प्रेरित किया और आज भी गूंजता है। वह हमेशा भारतीय इतिहास और संस्कृति में एक स्थायी व्यक्तित्व बने रहेंगे और उन्हें एक आध्यात्मिक नेता और आधुनिक भारतीय राष्ट्र के अग्रदूत के रूप में याद किया जाता है।

मुझे आशा है कि स्वामी विवेकानन्द पर ऊपर दिया गया निबंध स्वामी विवेकानन्द को गहराई से समझने में आपके लिए सहायक होगा

Conclusion:

उम्मीद करता हूं कि हमारे द्वारा लिखा गया आर्टिकल आप लोगों को काफी पसंद आया होगा ऐसे में आप हमारे आर्टिकल संबंधित कोई प्रश्न एवं सुझाव है तो आप लोग हमारे कमेंट्स बॉक्स में आकर अपने प्रश्नों को पूछ सकते हैं हम आपके प्रश्नों का जवाब जरूर देंगे।

FAQ’s: Swami Vivekananda Essay in Hindi

Q.स्वामी विवेकानंद का जन्म कब हुआ था?

Ans.स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को हुआ था।

Q स्वामी विवेकानंद कितने वर्ष के आयु में सन्यासी बने थे?

Ans.स्वामी विवेकानंद 25 वर्ष के आयु में सन्यासी बने थे।

Q.स्वामी विवेकानंद के माता जी का नाम क्या था?

Ans.स्वामी विवेकानंद के माता जी का नाम भुवनेश्वरी देवी था।

Q.स्वामी विवेकानंद के पिताजी का पेशा क्या था?

Ans.स्वामी विवेकानंद के पिताजी पेशे से कोलकाता हाई कोर्ट के वकील थे।

Q स्वामी विवेकानंद के जन्म जयंती को किस तौर पर मनाया जाता है?

Ans.स्वामी विवेकानंद के जन्म जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के तौर पर मनाया जाता है।

Q.स्वामी विवेकानंद का मृत्यु कब हुआ था?

Ans.स्वामी विवेकानंद का मृत्यु 4 जुलाई 1902 को हुआ था।

इस ब्लॉग पोस्ट पर आपका कीमती समय देने के लिए धन्यवाद। इसी प्रकार के बेहतरीन सूचनाप्रद एवं ज्ञानवर्धक लेख easybhulekh.in पर पढ़ते रहने के लिए इस वेबसाइट को बुकमार्क कर सकते हैं।

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