
पोलियो, जिसे पोलियोमायलाइटिस के नाम से भी जाना जाता है, एक गंभीर और संक्रामक रोग है, जो मुख्य रूप से छोटे बच्चों को प्रभावित करता है। इस बीमारी से मांसपेशियों में कमजोरी आ जाती है और यह शरीर के कुछ हिस्सों को पूरी तरह से लकवाग्रस्त कर सकती है। विश्व पोलियो दिवस हर साल 24 अक्टूबर को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य पोलियो के प्रति जागरूकता फैलाना और इस बीमारी के उन्मूलन के लिए किए जा रहे वैश्विक प्रयासों को प्रोत्साहित करना है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दुनिया को पोलियो से मुक्त किया जा सके और बच्चों को इस घातक रोग से बचाया जा सके।
विश्व पोलियो दिवस का इतिहास
विश्व पोलियो दिवस पहली बार 1988 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा शुरू किया गया था, जब पोलियो उन्मूलन के लिए ग्लोबल पोलियो उन्मूलन पहल (GPEI) की स्थापना की गई थी। इस पहल का उद्देश्य था कि पोलियो का पूरी दुनिया से खात्मा किया जाए और एक पोलियो मुक्त समाज की स्थापना हो। 1980 के दशक में पोलियो के मामलों की संख्या हर साल लगभग 350,000 थी, लेकिन जागरूकता अभियानों और टीकाकरण कार्यक्रमों के चलते अब यह संख्या बहुत कम हो चुकी है।
पोलियो क्या है? (पोलियो की परिभाषा और लक्षण)
पोलियो एक संक्रामक रोग है, जो पोलियोवायरस के कारण होता है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के मल से फैलता है और दूषित जल या भोजन के माध्यम से अन्य लोगों को संक्रमित कर सकता है। इस वायरस से प्रभावित व्यक्ति के मांसपेशियों में कमजोरी आ जाती है, और कभी-कभी यह बीमारी जीवन भर की विकलांगता का कारण बन सकती है।
पोलियो के लक्षण:
- प्रारंभिक लक्षण: बुखार, थकान, सिरदर्द, उल्टी, गर्दन में अकड़न, और अंगों में दर्द।
- गंभीर लक्षण: मांसपेशियों की कमजोरी, लकवा, और श्वास में कठिनाई। कई मामलों में, बीमारी मांसपेशियों के लकवाग्रस्त होने का कारण बनती है, जिससे स्थायी विकलांगता हो सकती है।
पोलियो का टीकाकरण और बचाव
पोलियो का सबसे प्रभावी उपचार और बचाव टीकाकरण के माध्यम से किया जा सकता है। ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी) और इनएक्टिवेटेड पोलियो वैक्सीन (आईपीवी) मुख्य रूप से उपयोग किए जाते हैं। पोलियो का टीका बच्चों को जन्म के कुछ समय बाद और बाद में कई बार लगाया जाता है, ताकि उन्हें पूरी तरह से इस बीमारी से सुरक्षित रखा जा सके।
पोलियो टीकाकरण कार्यक्रम:
- भारत में, पल्स पोलियो कार्यक्रम की शुरुआत 1995 में की गई थी, जिसका उद्देश्य देश को पोलियो मुक्त बनाना था। इसके तहत बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई जाती है, जिससे उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत हो जाती है।
- टीकाकरण के कारण, भारत ने 2014 में पोलियो मुक्त देश का दर्जा प्राप्त किया, लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि इस स्थिति को बनाए रखने के लिए टीकाकरण अभियान जारी रहे।
विश्व में पोलियो की स्थिति
जबकि अधिकांश देश पोलियो मुक्त हो चुके हैं, कुछ क्षेत्रों में यह बीमारी अब भी मौजूद है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान उन कुछ देशों में से हैं, जहां अब भी पोलियो के कुछ मामले सामने आते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य वैश्विक संस्थान इन देशों में टीकाकरण और जागरूकता अभियान चलाने में लगे हुए हैं, ताकि वहां भी पोलियो को समाप्त किया जा सके।
पोलियो उन्मूलन के लिए वैश्विक प्रयास
पोलियो के खिलाफ लड़ाई में WHO, UNICEF, और रोटरी इंटरनेशनल जैसे संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ये संगठन न केवल टीकाकरण अभियानों का संचालन करते हैं, बल्कि पोलियो के बारे में जागरूकता फैलाने और अनुसंधान के माध्यम से इस बीमारी के उन्मूलन के लिए काम करते हैं।
- ग्लोबल पोलियो उन्मूलन इनिशिएटिव (GPEI): यह विश्व स्तर पर पोलियो के उन्मूलन के लिए सबसे बड़ा कार्यक्रम है। इसके तहत लाखों बच्चों को पोलियो की खुराक दी जाती है और प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जाता है।
- रोटरी इंटरनेशनल: यह संगठन पोलियो के खिलाफ जागरूकता फैलाने और फंड जुटाने के लिए काम कर रहा है। इसके तहत कई देशों में पोलियो के उन्मूलन के लिए सक्रिय प्रयास किए जा रहे हैं।
- बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन: यह फाउंडेशन भी पोलियो के उन्मूलन के प्रयासों में प्रमुख भागीदार है। उन्होंने वैश्विक स्तर पर टीकाकरण कार्यक्रमों के लिए धन और संसाधन उपलब्ध कराए हैं।
भारत में पोलियो उन्मूलन की कहानी
भारत में पोलियो उन्मूलन की कहानी एक असाधारण उपलब्धि है, जिसने न केवल देश में बल्कि विश्व स्तर पर स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम की है। यह सफर आसान नहीं था, लेकिन सरकार, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और देश की जनता के सहयोग से भारत ने इस चुनौतीपूर्ण यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा किया।
प्रारंभिक दौर: पोलियो का प्रकोप
1980 के दशक में, भारत उन देशों में से एक था, जहां पोलियो का प्रकोप सबसे अधिक था। हर साल हजारों बच्चे पोलियो के कारण विकलांग हो रहे थे। उस समय, भारत में पोलियो के मामले सबसे अधिक थे और देश के स्वास्थ्य तंत्र पर इसका बड़ा बोझ था। गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों में, पोलियो से प्रभावित बच्चों की संख्या अधिक थी, जहां स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी थी और जागरूकता का अभाव था।
पोलियो से लड़ने की शुरुआत
पोलियो के खिलाफ भारत की लड़ाई 1985 में शुरू हुई, जब पहली बार ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी) के माध्यम से टीकाकरण अभियान चलाया गया। लेकिन यह अभियान तब तक व्यापक रूप से सफल नहीं हो सका, क्योंकि टीकाकरण की पहुंच सीमित थी और जागरूकता की कमी थी।
1990 के दशक की शुरुआत में, भारत में पोलियो के खिलाफ युद्ध को नई गति मिली, जब 1994 में दिल्ली सरकार ने ‘पल्स पोलियो अभियान’ की शुरुआत की। इस अभियान के तहत 1.2 मिलियन बच्चों को पोलियो की खुराक दी गई। इस सफल प्रयास ने पूरे देश में इस तरह के अभियानों को फैलाने के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया।
पल्स पोलियो अभियान की शुरुआत
1995 में राष्ट्रीय स्तर पर पल्स पोलियो अभियान की शुरुआत हुई, जिसका उद्देश्य हर बच्चे को पोलियो से सुरक्षा प्रदान करना था। इस अभियान के तहत, पांच साल से कम उम्र के सभी बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई गई। इसे एक महाअभियान के रूप में चलाया गया, जिसमें लाखों स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, सरकारी कर्मचारियों, और स्वयंसेवकों ने घर-घर जाकर बच्चों को टीका देने का काम किया।
पोलियो के खिलाफ जीत
2009 में, भारत में पोलियो का आखिरी मामला पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में सामने आया था। इसके बाद, लगातार तीन साल तक पोलियो का कोई मामला नहीं आया। 2014 में, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत को पोलियो मुक्त देश घोषित कर दिया। यह देश के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था और स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि।
पल्स पोलियो अभियान की विशेषताएं:
घर-घर जाकर टीकाकरण: पल्स पोलियो अभियान के तहत स्वास्थ्य कार्यकर्ता उन बच्चों तक भी पहुंचे, जो टीकाकरण केंद्रों तक नहीं आ सकते थे। यह अभियान सुनिश्चित करता था कि कोई भी बच्चा टीके से वंचित न रहे।
संचार और जागरूकता: पूरे देश में बड़े पैमाने पर प्रचार अभियान चलाए गए, जिसमें टीवी, रेडियो, अखबार, और स्थानीय माध्यमों का उपयोग किया गया। बॉलीवुड हस्तियों, विशेष रूप से अमिताभ बच्चन, ने इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
टीकाकरण बूथ: पूरे देश में लाखों टीकाकरण बूथ स्थापित किए गए, जहां माता-पिता अपने बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने के लिए ला सकते थे। यहां तक कि बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी टीकाकरण केंद्र बनाए गए।
पल्स पोलियो अभियान की मुख्य बातें:
- जनभागीदारी: इस अभियान में पूरे समाज का समर्थन मिला। माता-पिता, शिक्षकों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, और स्वयंसेवकों ने टीकाकरण केंद्रों पर जाकर बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने में मदद की।
- संचार और प्रचार: अभियान को सफल बनाने के लिए टीवी, रेडियो, अखबारों और सामाजिक माध्यमों पर बड़े पैमाने पर प्रचार किया गया। इसका उद्देश्य था कि हर परिवार अपने बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने के लिए प्रोत्साहित हो।
- सरकार की भूमिका: भारत सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों ने पोलियो उन्मूलन के प्रयासों में पूरा सहयोग दिया। इसके तहत स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया गया और दूर-दराज के क्षेत्रों में भी टीकाकरण सेवाएं पहुंचाई गईं।
पोलियो उन्मूलन के लिए चुनौतियाँ
हालांकि पोलियो उन्मूलन की दिशा में काफी प्रगति हुई है, लेकिन कुछ चुनौतियाँ अब भी बनी हुई हैं:
- टीकाकरण तक पहुँच: कुछ दूरदराज और संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में टीकाकरण सेवाएं पहुंचाने में कठिनाई होती है। इन क्षेत्रों में पोलियो के मामलों के पुनः उभरने का खतरा बना रहता है।
- वैक्सीन के प्रति हिचकिचाहट: कुछ समुदायों में पोलियो वैक्सीन के प्रति हिचकिचाहट और गलत धारणाएँ भी टीकाकरण कार्यक्रमों को बाधित करती हैं।
- स्वास्थ्य सेवाओं की कमी: जिन देशों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी है, वहाँ पोलियो के उन्मूलन के प्रयास धीमे पड़ जाते हैं।
विश्व पोलियो दिवस 2024: जागरूकता और गतिविधियाँ
विश्व पोलियो दिवस 2024 के अवसर पर दुनिया भर में जागरूकता कार्यक्रम, सेमिनार, और स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे। इस दिन का उद्देश्य लोगों को पोलियो के बारे में शिक्षित करना, टीकाकरण के महत्व को समझाना, और पोलियो उन्मूलन के लिए चलाए जा रहे वैश्विक प्रयासों का समर्थन करना है।
विश्व पोलियो दिवस पर की जाने वाली गतिविधियाँ:
- जागरूकता रैलियाँ: स्कूलों, कॉलेजों और संगठनों में पोलियो के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए रैलियाँ आयोजित की जाती हैं।
- टीकाकरण शिविर: विश्व पोलियो दिवस पर कई क्षेत्रों में मुफ्त टीकाकरण शिविर लगाए जाते हैं, ताकि अधिक से अधिक बच्चों को पोलियो से सुरक्षा मिल सके।
- मीडिया अभियान: इस दिन टीवी, रेडियो, और सोशल मीडिया पर पोलियो के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष कार्यक्रम और अभियान चलाए जाते हैं।
पोलियो मुक्त दुनिया की ओर: भविष्य की दिशा
विश्व पोलियो दिवस का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पोलियो का पूरी तरह से उन्मूलन हो सके। इसके लिए वैश्विक संगठनों, सरकारों, और समुदायों को मिलकर काम करने की आवश्यकता है। एक पोलियो मुक्त दुनिया तभी संभव है जब हर बच्चा पोलियो टीकाकरण के माध्यम से सुरक्षित हो।
पोलियो उन्मूलन के लिए आपकी भूमिका:
- जागरूक रहें: पोलियो के लक्षणों, टीकाकरण के महत्व और पोलियो मुक्त समाज के प्रयासों के बारे में जानें।
- टीकाकरण कराएं: सुनिश्चित करें कि आपके बच्चे को समय पर पोलियो का टीका लगे।
- समुदाय में जागरूकता फैलाएं: अपने परिवार, दोस्तों और समुदाय के अन्य लोगों को पोलियो के बारे में जागरूक करें और टीकाकरण के लिए प्रेरित करें।
निष्कर्ष
विश्व पोलियो दिवस 2024 हमें इस बात की याद दिलाता है कि पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से लड़ने के लिए हमें एकजुट होकर काम करना होगा। पोलियो उन्मूलन के लिए किए गए प्रयासों ने हमें इस बीमारी के खात्मे के बेहद करीब ला दिया है, लेकिन यह यात्रा अभी भी अधूरी है। टीकाकरण के महत्व को समझते हुए और जागरूकता फैलाते हुए, हम एक पोलियो मुक्त दुनिया की ओर बढ़ सकते हैं।